पुलिस ने पकड़े डामर के दो ट्रक - कार्यवाही नहीं चाहने पर दो दिन बाद छोड़ दिये ट्रक। डामर चोरी करने वालो की मौज़ ही मौज़।



संदेहास्पद कार्यवाही और पुलिस का तालमेल ऐसा बैठा हुआ रहता है कि हर अवैध कार्यवाही में पुलिस पर नजरें टेड़ी ही रहती हैं। हाल ही में पुलिस ने मुकबीर की सूचना पर डामर के ऐसे दो ट्रक पकड़े जिसमें से अवैध कारोबारी डामर की चोरी कर रहे थे। 
पुलिस के पहुंचते ही ट्रक ड्राईवर और क्लीनर स्थान छोड़ कर फरार हो गये। पुलिस ने ट्रक झाबुआ थने पर नहीं रखते हुये पिटोल चौकी पर प्रभारी रमेश कोली के निरिक्षण में रखे।
पिटोल चौकी पर जानकारी लेने पर जवाब एक ही मिलता जो भी बताएगे टी आई साहब ही बताएगें। 



क्षेत्र के फुलमाल से पिटोल तक के रास्ते में अवैध कारोबारियों का कब्जा हैं जो कि गांव के दबंग ग्रामीण आदिवासी को अधिक कमाई का लालच देकर अवैध कार्य की रखवाली का हिस्सेदार बना कर रखते हैं। और धडल्ले से अवैध काम में जुट जाते हैं। जिसकी जानकारी प्रशासन के नुमाइंदो के जेब में भी सुरक्षित रखी होती हैं। 

हालांकि, दो डामर ट्रकों से चोरी किये गये डामर की चोरी की रिपोर्ट तक दर्ज नही की गयी। जिसका कारण बताते हुये टी आई झाबुआ ने कहा कि, जिन ट्रकों से डामर चोरी किया जा रहा था, उन ट्रकों के मालिक ने कहा कि वें खुद कोई कार्यवाही नहीं चाहते। इसलिये मामला खत्म। 
लेकिन मामला तो शुरू ही है, जिस कम्पनी से माल लिया जिस कम्पनी को माल दिया उनको कोई शिकवा शिकायत नहीं, चोर चोरी कर रहा है और कार्यवाही नहीं तो सलाखों के पीछे चोर नहीं। 


बहरहाल, दिखावें के चार दिन और फिर उसके बाद पांचवे पहर में फिर से अवैध कार्य शुरुआत। इस प्रकरण में भी कार्यवाही नहीं की गयी क्युंकि, बिना कार्यवाही के ट्रक लंबी देरी तक रख नहीं सकते और दबाव के कारण कार्यवाही कर नही सकते। फिर जोरदार अंकों का भी सरोकार है, जिसने शिकायत की वो तो भारी अंकों के घेरे में आया ही फिर खाकी भी।
जानकारी के अनुसार तो पिटोल से लगा कर फुलमाल के रास्ते हर ढाबे पर अवैध कारोबारी की चाय उकलती है। पिछ्ली बार तत्कालीन कलेक्टर मिश्रा ने कार्यवाही नहीं की तो भोपाल से टीम ने आ कर छापा मारा था। 
खैर पुलिस भी गुलाबी ठंड में हवाओ का रुख बदलना चाहती हैं।

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