ग्रामीणों के आक्रोश में पथराव से पुलिस ने डंपर चालक को बचाया- खुद खाकी भी बची पथराव से, देखे वीडियो- 8 मासिक गर्भस्थ शिशु की मौत, जयस कर रहा मृतक के परिवार को एक-एक करोड़ मुआवजे की मांग।





शुक्रवार को  पीपलखूंटा ग्राम के मार्ग में एक भीषण हादसा हुआ जिसमें 4 मार्मिक मौते हो गयी। घटना स्थल पर 2 वर्ष की मासूम बच्ची के साथ उसके पिता और एक ग्रामीण ने वहीं मौके पर दम तोड़ दिया तो गर्भ में पल रहे शिशु की मौत महिला के उचित उपचार के दौरान हुई। 
ऐसे दर्दनाक मन्ज़र से भड़के ग्रामीणों ने आक्रोश में आ कर पथराव कर दिया। 
इस पथराव में बहुत से लोग घायल हुये पुलिस के करीब 6 कर्मचारी को चौट आयी। वहीं इस दुर्घटना के परिणाम में जयस संगठन ने ज्ञापन दिया और मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की हैं।



इस वीडियो में आप देखे कि किस तरह ग्रामीणों में गुस्सा था कैसे वो पत्थरों से उस चालक को मारना चाहते थे जिसके डंपर की वजह से ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ कि घटना स्थल पर 3 मौत हो गयी और गर्भ में पल रहे 8 माह के शिशु को भी इस दुनिया में आने से पहले ही इस दुनिया को छोड़ना पड़ा।
प्रबुद्ध जनों का कहना है की ऐसी दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिये बौद्धिक होना जरूरी है। जिसमें प्रशासन, सामाजिक और राजनैतिक लोगों का जुड़ने की जरुरत हैं। जो अपने अपने क्षेत्र में पहुंच कर जागरुकता का अलख जगाएं।  
 
हालांकि, दुर्घटना के मुख्य कारणों में इस भयंकर दुर्घटना का कारक तेज रफ्तार हैं। गति तेज होने के साथ-साथ सड़के भी संकरी और गड्डे युक्त होने के कारण चार जीव काल का ग्रास बन गये। 
पिपलखूंटा क्षेत्र के आगे खदानों से आने वाले वैध और अवैध डंपर अक्सर तेज गतिमान ही रहते है उस पर बाइक सवार भी अधिकतर जल्दबाजी में होते हुये चलते हैं। फिर जब वाहन अपनी निर्धारित गति से तेज चलाये जयेगे तो निश्चित ही नियमों का उल्लंघन होगा और जब नियमों के उल्लंघन में अति होगी तो सम्भवत दुर्घटनाएं घटित होगी। 

बहरहाल इन चार मौतों से भी अगर राजनैतिक प्रशासन और सरकार जागती नहीं हैं तो दिक्कार है उन के जागरूक कार्य और विकास पथ की बातों पर। समाजिक संगठन आंदोलन करेंगे मगर सरकार और प्रशासन सोया ही रहा तो सारे कार्य निराधार ही रहेगे। 

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