चुनाव चरणों में शराब के भावों में उतार चढ़ाव- 3 बजे से बन्द शराब दुकाने, पर गांव-देहात पहले ही पहुंच गयी शराब। आबकारी विभाग सुस्त, ठेकेदार मस्त, निर्वाचन बेखबर।



चुनाव हो और शराब का जिक्र न हो ऐसा हो ही नही सकता, झाबुआ जिले में हर गांव गली में चुनाव के चलते ग्राम पंचायत के घर घर में चोरी छुपे शराब बंटी । वहीं चुनाव के चलते जिले की दुकानो पर शराब के भाव में कभी भी बराबरी नही देखी गयी। हर बार, हर दुकान पर शराब के भाव में बदलाव पाया गया। 

चुनाव के प्रथम चरण में भी कुछ ऐसा ही हुआ, पेटलावद और थांदला क्षेत्र में रातो रात शराब बांटी गयी। हर प्रत्याशी की तरफ से गान्व में शराब पहुंची। और बंटी भी। पुलिस और आबकारी विभाग के होते हुये भी प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों द्वारा गांव के तमाम वोटरस को शराब दी गयी। जबकि पेटलावद और थांदला क्षेत्र के आबकारी के एस आई, पूरे क्षेत्र में रेग्युलर भ्रमण कर निर्वाचन की ड्यूटी पूरी कर रहे थे। फिर भी दुकाने बन्द होने के बाद भी गांव गांव लोगों तक शराब पहुंची। 


आगामी पंचायत चुनाव के दूसरे चरण को देखते हुये जिला कलेक्टर ने एक पत्र जारी किया है जिसमे दूसरे चरण के चुनाव के प्रभाव में झाबुआ, रानापुर, रामा, और मेघनगर, की शराब दुकानों को बुधवार दोपहर 3 बजे से मतदान गणना तक दुकानें शराब की बन्द रहेगी।
राजनीति विशेषज्ञो के अनुसार दुकाने शराब की चाहे बन्द रहे,,, फिर भी वोटरस को लुभाने के लिये, शराब उन तक पहुंच ही जाती हैं। चाहे चुनाव के दौरान पहरा पुलिस का हो आबकारी का। 


हालांकि पंचायत चुनाव में जीत की निर्भरता बहुत कुछ शराब पिलाने पर होती हैं। वही शराब दुकान या गांव की दुकानों पर बीयर या क़्वाटर पर एमआरपी से कभी तो 10 या 20 या फिर 30 रुपये अधिक लिये जाते हैं। 
बहरहाल शराबी फिज़ा में चुनावी प्रपंच का दाव वो लोग खेल रहे हैं जो दिखते नही है वो कब कम्बल ओढ़ के खीर पी जाते हैं पता ही नहीं चलता। मगर ज्ञानीजनो का यही कहना है बिना शराब के चुनाव सम्पन्न होना नामुमकिन हैं। 

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