पुलिस और आबकारी विभाग के साथ अब राजस्व भी कर रहा अवैध शराब पर कार्यवाही-झाबुआ तहसीलदार ने बताया कि शराब वाहन के सिर्फ कागज चेक कर छोड़ दिया।



झाबुआ जिला अवैध कारनामों में अव्वल होता जा रहा हैं यहां के लोगों को और यहां पर व्यापार करने वाले व्यापारियों को इस बात का अच्छे से भान हो चूका है कि या जिला अन्य दो राज्यों की सीमा से जुड़ा हुआ है जिसका फायदा उठना बहुत ही आसन हैं। फिर जेसे को तेसा ही मिलता हैं। 


जिला प्रशासन भी वैसी चाल चल कर नेहले पर देहला चल देता हैं।
 सूत्रो के अनुसार भगौर क्षेत्र में राजस्व की टीम ने एक शराब से भरे वाहन पर बड़ी कार्यवाही की। मगर सूचना के मुताबिक वो कार्यवाही पूरी नहीं हो पायी। 
इस मामले में जब झाबुआ तहसीलदार से बात की गयी तो उन्होने कहा कि उनकी जानकारी में नही है, अगर नायब तहसीलदार गये हो तब पुछ के बताते हैं। 
फिर दोबारा जब कार्यवाही की जानकारी ली गयी तब तहसीलदार ने बताया कि, 15 मार्च की रात को नायब तहसीलदार ने कार्यवाही के लिये शराब से भरे वाहन को रोका जरुर था मगर कागज पुरे होने पर उसे छोड़ दिया गया।

इस कार्यवाही पर सवाल पर सवाल सामने आ रहे हैं। इतना बड़ा शराब से भरा वाहन रात में उस दिशा में कहां से कहां जा रहा था। 
नायब तहसीलदार ने रात 9 बजे के लगभग कार्यवाही की तो अगली दोपहर तक तहसीलदार को इसकी खबर क्यूं नहीं हो पाई। 
आबकारी विभाग के होते हुये राजस्व विभाग को वाहन के कागज चेक करने की आवश्यकता क्यूं हुई। 
क्या आबकारी विभाग में इतनी असक्षमता आ गयी, या कोई और ही बात हैं। 
वाहन की दिशा और रास्ता सही नही था तब जिले की पुलिस का तन्त्र फ्यूज़ हो गया था या पुलिस के बिछाये हुये जाल की गांठें खुल गयी थी। 
ऐसे और भी सवाल है जिनके जवाब जरूरी हैं।

दरअसल परिस्थियां प्रश्न करती हैं और फिर जनता इतना तो जानती ही हैं कि जब ऐसा कोई कृत्य होता है तो उसके पीछे कितना और कहा तक सत्य होता है। कार्यवाही सिर्फ इतनी करनी थी कि वाहन को रोक कर कागज़ देखने थे फिर फोन की घंटीया बजनी थी, मुलाकात तय होने पर वाहन को जाने दिया जिस तरफ वो जा रहा था। 

हालांकि, बुद्धिजीवी वर्ग की सूचनाओं के अनुसार गुजरात की पुलिस ने शराब के वाहनों पर जम कर कार्यवाही की है, जिसकी भनक न तो झाबुआ की पुलिस को हो पायी है न ही आबकारी को। 

बहरहाल, खेल खेल में कोई खेल हो जाता हैं। अभी तक की जानकारी के अनुसार शराब पर कार्यवाही के लिये या तो आबकारी विभाग जाता है या फिर पुलिस प्रशासन। अगर राजस्व विभाग को जाना भी पड़ा तो आबकारी या पुलिस किसी को साथ में लिया जाता हैं। 

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