विरोधाभाष और विसंगतियों का विवरण- जिला कलेक्टर ने विद्यार्थियों को निर्वाचन की मिटिंग में होने की दी थी सफाई- छात्रा के वायरल वीडियो ने झुकाया प्रशासन।



दिसम्बर माह में  बीती 24 तारिख को जिला कलेक्टर ने एनएसयूआई के पदाधिकारियों को बुला कर एक बैठक आयोजित की। साथ ही उस बालिका विद्यार्थी को भी बुलाया जिसने उग्रता के साथ जिला कलेक्टर को कटुवचन कहे थे। 
बालिका विद्यार्थी की हिम्मत को सभी ने सराहा लेकिन उसकी नादानी और उस नादानी में फुहड़ता को कोई क्यु नहीं समझ पाया। उसमें उग्रता की असभ्यता को देखा जा सकता हैं। जिस तरह वो खुद को कलेक्टर बनाने की बात चिल्ला-चिल्ला कर कहती है और उसके आस-पास के साथी इस बात पर विरोधाभाष में विनोद भाव से ठिठोली करते हैं। 
जागरुकता का इस कदर अभाव है कि कलेक्टर बनने के लिये कितनी समझदारी, कितनी मेहनत, कितनी पढ़ाई, और कितना शिष्टाचार लगता है ये बात उस छात्रा को पता नहीं जिसने जोश में आ कर जो शब्द कलेक्टर को कहें। 


भीड़ की भारी ताकत के कारण जोशीली विद्यार्थी ने जो कहा वो हिम्मत का विडियो वायरल हुआ, छात्रा का अपनी मांगो को लेकर आंदोलन करना स्वाभाविक है और हक़ की लड़ाई तारिफ-ए-काबिल भी है, 
 लेकिन उसमें स्पष्ट फुहड़ता और असभ्यता दिखाई पड़ती है, जिससे यह जहीर होता है कि एनएसयूआई हिम्मत दे कर हक़ लड़ाई लड़ना तो सिखाती है मगर सभ्यता और शिष्टाचार की सूसंस्कृति नहीं सिखाती। 

हालांकि, छात्रा के वायरल हुये विडियो ने प्रशासन को इस कदर झुका दिया की जिला कलेक्टर को बैठक आयोजित करनी पडी और सफाई भी देनी पडी कि वो विद्यार्थियों की समस्या सुनने इसलिये नहीं आ पाये  क्युंकि वो निर्वाचन की मिटिंग में थे। खैर कलेक्टर ने विद्यार्थियों की समस्याओ का समाधान करने की बात कही हैं। RTO अधिकारी भी बस मालिको से बात करके जबाव देगी। महाविद्यालय प्राचार्य भी मिटिंग लेकर समाधान की तरफ कदम बढायेगे। 


छात्रा के वायरल विडियो ने यह जरुर साबित कर दिया की भीड़ में खड़े हो कर फुहड़ता और असभ्यता के साथ कुछ भी कह देने से प्रशासन झुक जता है, और डर जाता है। और समस्या सुनने के लिये बुला कर समकक्ष बैठता हैं। 

बहरहाल, बालिका की बात में जो मानसिकता थी, जो दर्द था वो उस अज्ञान के अंधरे की चुभन थी जिसमें जागरूकता का अभाव था। जो कि बरसो बरस बने रहे आदिवासी अंचल के सांसद, विधायक, सरपंच, पार्षद सभी ने कभी नहीं चाहा की क्षेत्र का आदिवासी समाज जागरूक हो जाये। बस भोले भाले आदिवासी समाज को योजनाओ के नाम पर प्रत्येक नेता ने गाढी कमाई कर खुद के लिये खूब धन कमाया।

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