नगर पालिका को बस स्टैंड से अवैध कमाई- कांग्रेस की नगर पालिका में भ्रष्ट जनप्रतिनिधि, अधिकारी कर्मचारी की मिलीभगत से दुर्गति की राह पर स्थानिय बस स्टैंड।


झाबुआ नगरपालिका को बस स्टैंड की दुर्गति पर दया नहीं आती क्युंकि बस स्टैंड के रसूखदार साफ तौर पर अपनी बसो को मनमानी करने का नगर पालिका में चढ़ाव देते हैं।  
बसो की मनमानी का आलम इस कदर का है कि, बस जब स्टैंड से निकलती है तो विजय स्तम्भ तक जाते जाते बहुतों बार रुकती हैं सवारी चढ़ाने के लिए लिये इसी प्रकार बस स्टैंड पर आने में कम दुरी पर बहुतो बार रुकती हैं। जिससे हर बार बस के निकले पर यातायात व्यवस्था गड़बड़ा जती हैं। और जिम्मेदार यातायात विभाग चलानी कार्यवाही कर धोष जमाता फिरता हैं। 
बसो की इस बेकार की आदत पर नगरपालिका लगाम लगा सकती है मगर बस मालिक पहले ही लगाम लगाने वाले हाथो पर लगाम कस देते हैं। फिर भ्रष्ट नेताओ की नगरपालिका जनता की, शहर के ट्राफिक की बिना कोई परवाह किये लापरवाह हो जाती हैं। 




 पैसो के लालच में लार टपकाती नगर पालिका ने इस पहलू को नज़र अंदाज़ कर रखा है फिर बस स्टैंड में मकड़जाल की तरह फैले बस के एजेंट मनमानी और दादागिरी से काम करते हैं। क्युंकि नगर पालिका और यातायात वालों की जेब गरम करने से कोई इन लोगों को बोलने वाला होता नहीं हैं। 

नगर पालिका के जिम्मेदार मुखिया किस कदर बस स्टैंड में  भ्रष्टाचार कर झोली भर लेते हैं! पसीना बहती आम जनता, इस बात की समझ से परे हैं। बस स्टैंड से अवैध कामाई का सिलसिला जारी रहता है जिसका सच भी जनता को जानना जरूरी हैं। इसके लिये जागरूकता की लहर में जनता को जागना होगा। 


हालांकि कांग्रेस की नगर पालिका में फंदे हजार बांध रखे हैं। हर काम में घोटाला हैं जिसके सपोर्ट में नगरपालिका का हरेक कर्मचारी लिप्त हैं। और नेताओ के साये में बेखौफ़ हो कर बेबाक सीना तान कर घपले-घोटालोंके लिये तत्पर हैं। 
बहरहाल बसो की ऐसी कंडीशन बन जाती है कि अव्यवस्था से पटा पड़ा बस स्टैंड शहर के लिये दाग धब्बेदार हो जिसे व्यवस्थित करने के लिए न तो नगर पालिका कोई शुरूआत कर रही है ना ही यातायात विभाग। क्युंकि दोनों के पास बस स्टैंड से अवैध कमाई का सिलसिला जारी हैं।

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