स्वयं सहायता समूहो से मांगे जा रहे है बिना नाम के चेक- पोषण आहार कार्यक्रम में आईसीडीएस का बडा घोटाला।



महिला बाल विकास विभाग जिले में महिलाओ और बच्चों के विकास की जिम्मेदारी लिये अपने सारे कार्य, सारी योजनाओ को क्रियान्वित कर संचालित होता हैं, मगर विभाग के आला अधिकारी अपनी मनमानी से अधीनस्थ को हांकते है। फिर घोटालों का जन्म होता है जिसमें पुरा विभाग शामिल रहता हैं। तभी तो विभाग में भ्रष्टाचार की उपज आंगनवाड़ी केन्द्रों में पनप कर विभाग के लालची भ्रष्ट पौधे को पनपा देती है। 


यहां भी मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है सूत्रो के मुताबिक विभाग ने स्वयं सहायता समूह को बिना नाम के चेक देने के लिये धमकया हैं। जिसमें से कुछ भोले भाले समूह के मुखिया ने दे दिये है मगर कुछ मुखियाओ ने इस बात का विरोध कर दिया। जिसके फलस्वरुप वो मुखिया भी विरोध में आ गये जिन्होने पहले ही विभाग को बिना नाम का चेक दे दिया था।
नाम न बताने की शर्त पर स्वयं सहायता समूह के मुखिया ने बताया कि पहले तो विभाग ने हमको पोषण आहार लाने के लिये एक गांव में पहुचाया। जहां इतना घटिया पोषण आहार था कि जिस किसी के पास गया उसने बुरा-बुरा ही कहा। और जब पेमेंट की बारी आयी तो विभाग ने बिल के साथ बिना नाम के चेक मंगवा दिये और यह भी कहा कि जो पैसा समूह के खाते में आयेगा उस के लिये ही चेक हैं। 

इस सम्बंध में जब विभाग के प्रभारी अधिकारी से सवाल किया गया तो अधिकारी का जवाब सीधा था की ऐसा तो बिल्कुल भी नही हैं। हम ऐसे चेक क्यु मंगवायेगे। 



हालांकि, विभाग के द्वारा घोटाला तो किया गया हैं। क्युंकि जब जिला कलेक्टर ने एक ऐसे व्यक्ति को आईसीडीएस का प्रभार सौपा हैं जिसने जिले में अधिकारी रहते हर कदम पर भ्रष्टाचार का खेल खेला हैं। ताजा उदाहरण कोरोना काल का ही ले सकते है उसे तो कोई भी भूला नही होगा। 

बहरहाल चोर के हाथ में चाकू है। और बरकरारी के लिये कुछ महिनो पहले बहुत महंगा मोबाइल गिफ्ट दिया जा चुका हैं। 
खैर जिले में करीब करीब 75 के आस-पास केन्द्र हैं और 2 हजार से ऊपर आंगनवाड़ी हैं।
जो व्यक्ति बच्चों के मुहं का निवाला छीन ले, उनके पोषण के अवरोधक बने ऐसे अधिकारी कर्मचारोयों को सज़ा अवश्य ही मिल
मिलना चाहिए। 

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