सब शामिल है छात्रावास के घोटाले में, गड़बड़ी के सरदार तत्कालीन DPC ने दफ़न किये सारे राज़। BRC से APC बनने के पीछे भी छुपे है तत्कालीन DPC के गहरे राज़।



रातितालाई स्कूल परिसर में एक गोडाउन में तत्कालीन DPC की जादुगरी से तत्कालीन कलेक्टर के आदेश पर जिस तरह ताबड़तोड़ रद्दी हटाई गयी, साथ ही कुछ पुराना समान भी वहा रखा था उसे भी गोलमाल गोपाला कर दिया गया। और तुरंत ही मौखिक आदेश पर शहर जिले में पन्नी बिनने या मजदूरी करने वाले बच्चों के लिये नवीन छात्रावास खोल दिया गया जिसमें बच्चें भी आ गये जो कि किसी प्रकार से कोई श्रमिक की श्रेणी में नहीं थे। 
फिर भी होस्टल संचालित किया गया और इस अनाधिकृत होस्टल को शुरू कर संचालित करने में सभी कर्मचारियों की मिलीभगत थी। उस वक्त के BRC जो आज APC है सारा कार्य उसकी देखरेख में ही हुआ हैं।  तत्कालीन DPC के कहने पर उस वक्त के BSC ने भी इस छात्रावास में खूब दौड़ लगाई। 
और यह सब काम मौखिक आदेश पर ही किया गया किसी के पास कोई लिखित में आदेश नहीं था। न ही उस वक्त के BRC पर न ही दौड़ने वाले BSC पर और न ही रातितालाई स्कूल के प्राचार्य के पास। 


दबी जुबां से कहने वाले बताते है कि, उस समय रद्दी के अलावा उस पुराने गोडाउन में गडरें भी रखी थी। रातितालाई स्कूल का बरसो बरस का भंगार भी रखा था। साथ ही साथ उस गोडाउन में करीबन 80 की संख्या में स्टेनशील मशीनें भी रखी थी। 
इन सब का क्या किया गया किसी को कुछ नहीं पता सारा कार्य मौखिक आदेश पर किया गया।
अब यदि तत्कालीन DPC के कार्यकाल की जांच सूक्ष्मता से की जाये तो ढेरों क्लू मिल जायेगे जिसमें गबन का गणित डाल कर गुणा भाग कर शेषफल बटौर लिया। जो किसी अन्य को पता भी नहीं चला। 

हालांकि, उस वक्त जो BRC था वो कांग्रेस के युवा अध्यक्ष का कृपा पात्र था फिर अब APC इसलिये भी है क्युंकि वो तत्कालीन DPC के बहुत से कारनामों के राज़दार भी हैं।

बहरहाल, अभी APC वित्तिय DPC के सारे कार्य देखता है और नये DPC को राह भी दिखाता हैं। लोग कहते तो यहां तक भी है कि APC ही DPC बना बैठा हैं। फोन पर बात भी APC ही करता है। 
अब जरुरत जांच दल के बन जाने की है जो मुख्यतह जांच कर ले तो जर्रे जर्रे से गबन बू भ्रष्टाचार साबित कर देगी। 

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