स्थानांतरण के आदेश की अवहेलना- पकड़, पैसा, और पहुंच वाले शिक्षकों को नहीं किया कार्यमुक्त। सहायक आयुक्त अभी तक नहीं कर पाये लिस्टिंग।



भाजपा की सरकार में तबादलों की कहानी में अनेकोनेक ट्विस्ट हैं। ट्रांसफर के बाद कुछ विरोधी पक्ष से पैसा लेकर तबादले में हेराफेरी के आरोप के साथ भाजपा में अपनो द्वारा ही अपनो के नाम उजागर करने के आरोप भी सम्मिलत हैं। फिर करीब-करीब 70 प्रतिशत ऐसे शिक्षक है जिनको तबादले के आधार पर अभी तक रिलिव ही नहीं किया हैं।

जबकि स्थानांतरण के आदेश में स्पष्ट लिख है कि उचित समय में रिलिव किया जाये और फिर स्थानांतरित हुये शिक्षक का अगला वेतन उसी संस्था से निकला जाये, जहां पर तबादला किया गया हैं। मगर प्रशासन की मिलीभगत कहो या राजनीति का दबदबा या फिर माया का इस जेब से उस जेब में जाना। तबादले हुये बहुत से शिक्षक कार्यमुक्त नहीं हुये हैं। 

विशेषज्ञों की राय इसमें यह है कि, ऐसे शिक्षक जो राजनीती में पक्षधर हैं, ऐसे शिक्षक जिनकी सांसद खेमे में पहचान है, ऐसे शिक्षक जिनकी भाजपा जिलाध्यक्ष से राम राम है, ऐसे शिक्षक जिनकी जेब में माल हैं। और कुछ ऐसे भी है जिनकी बातचीत उस प्रभावशाली व्यक्ति से है जिसकी जान पहचान, सीधी बात प्रभारी मंत्री से है। वो सभी अभी किसी न किसी बहाने से अपनी संस्था से कार्यमुक्त नहीं हुये हैं।
बहुत से स्थानों पर तो स्वयं सहायक आयुक्त ने फोन लगा कर मना किया है। सहायक आयुक्त का इस संबंध में कहना है कि, उन शिक्षकों को मना किया हैं जिनके जाने से शाला शिक्षक विहीन हो जायेगी। 
जिस पर सवाल यह बनता है कि तबादलों के आदेश पर हस्ताक्षर तो सहायक आयुक्त ने किये थे, तब इस बात पर मंथन क्यूं नहीं किया गया कि किसी शिक्षक के स्थांतरण से कोई शाला शिक्षक विहीन भी हो सकती हैं, और यदि इस बात का आभाष था तो फिर किस दबाव में ऐसे शिक्षक का स्थानांतरण क्यूं किया गया। 



हालांकि यह तो स्थानांतरण कि बहुत छोटी-सी दास्ताँ है। इसकी और भी बहुत बातें बाकी है। जो शिक्षक कार्यमुक्त नहीं हुये उनकी लिस्टिंग के साथ कारण बताओ का नोटिस भी आना बाकी हैं। 
जिले के सहायक आयुक्त इसके लिये कई दिनों से प्रयासरत हैं। मगर मंगलवार के बाद इन कार्यो में तेज़ी आ जायेगी और ऐसे शिक्षक जिनको तबादलों के बावजूद भी कार्यमुक्त नहीं किया है उनकी लिस्ट सहायक आयुक्त के हाथों में होगी। 

बहरहाल स्थानान्तरण के आदेशानुसार यदि कार्यवाही नहीं की जाती है तो प्राशसनीक दृष्टि से उन सभी पर कार्यवाही हो सकती है जिन्होनें शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं किया। और जो कोर्ट से स्टे लेकर भी आये है उन की भी तबादले की कहानी का अंत अवश्य किया जायेगा, क्युंकि कोर्ट ऐसे मामले में निर्णय नहीं देता हैं। सम्बंधित अधिकारी को बीच बचाव का रास्ता निकलने के लिये आदेश देता हैं, और अधिकारी उसी रास्ते में एक बार रुक कर गुजर जाता है। 

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