रात में मारपीट की घटना पर गरमाया विवाद- हिंदू जनजाति संगठन ने पुलिस पर आरोप लगते हुये नारेबाजी कर चौकी के सामने ही जलाया पुलिस का पुतला।



मामला मारपीट का है और घटना बीती तीसरी रात की हैं। घटना के संबंध में आरोप लगाने वाले हिंदू युवा जनजाति संगठन का अलग फ़साना है तो पुलिस की कहानी भी अलग हैं। 
हिंदू युवा जनजाति संगठन द्वारा बुधवार को पारा चौकी के समाने विरोध दर्ज करवाया और वहीं पर पुलिस का पुतला जलाया। जिसके बाद पारा चौकी प्रभारी के विरुद्ध उचित कार्यवाही की मांग की है। 


मामले की जानकारी देते हुये हिंदू युवा जनजाति संगठन ने बताया कि, सोमवार की बीती रात को पुलिस ने बेवजह संगठन के एक कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। घटना रात 10 बजे की बताई जा रही हैं। उस वक्त पारा के एक स्थान पर कुछ युवा एकत्र हो कर शराब का सेवन कर रहे थे तभी पुलिस वहा आयी और शराब पीते हुये युवाओं को वहा से भगाया। तब वहा हिंदू युवा जनजाति संगठन का कार्यकर्ता भी खड़ा था जो की संगठन के अनुसार ऐसे ही खड़ा था वो शराब नहीं पी रहा था, तो पुलिस ने उसकी भी जमकर पिटाई कर दी। 
साथ ही साथ संगठन का यह भी कहना है कि यदि कार्यकर्ता ने शराब पी हुई थी तो उस पर पुलिस द्वारा जो भी उचित कार्यवाही की जाती है वो करें।  


खैर रात की 10 बजे पुलिस शराब पीने वालों को भगा रही है तो ऐसा क्या कारण बनता है जो पुलिस सिर्फ एक ही युवा पर लठ्ठ बरसायेगी। इसके लिये जब पारा पुलिस चौकी प्रभारी से बात की गयी तो उनकी जानकारी के मुताबिक सच्चाई कुछ और ही हैं। 
पुलिस ने बताया कि, रात करीब-करीब 12.30 के आसपास सदर बाजार में रहवासियों की शिकायत थी कि, कुछ युवा शराब पी रहे है और अशब्दो का उपयोग कर बात कर रहे हैं। पुलिस वहां पहुंची और लड़को को वहां से भगाया मगर एक युवा पास में आया और दादागीरी से पुलिस के गिरेबान पर हाथ डाल दिया। बस इसी बदसलुकी का जवाब पुलिस ने दिया और झूमा झटकी में युवा का मोबाईल गिर गया। पुलिस उस युवा को चौकी ले गयी जिसके बाद युवक के पिता ने युवक को छुड़वाया।



हालांकि, दोनों की जुबानी घटना में अंतर की अधिकता के  साथ आरोपित शब्द भी शामिल हैं। अगर युवा रात 10 बजे शराब पीते हुये साथियों के साथ खड़ा था तो पुलिस के भगाने पर वह भी साथियों के साथ क्यूं नही भगा और यदि पुलिस ने सिर्फ उसी के साथ अभद्र व्यवहार किया या मारपीट की तो अगले ही दिन संगठन ने विरोध क्यूं नही किया।  
वहीं पुलिस ने जब आधी रात को शराब पीते हुये युवाओ को भगाया तब बत्तमिजी करने वाले युवा कर प्रकरण क्यूं दर्ज नहीं किया। 

बहरहाल, गलती अगर दोनों की है तो समझोते की गाडी में सवार हो जाना चाहिये, और अगर गलती किसी एक की है तो उसे सख्त सज़ा देनी चाहिये। पुलिस रक्षा, सुरक्षा के लिये हैं। समुदाय की सुरक्षा के लिये कभी किसी एक पर सख्ती अपनाना भी जरूरी है।

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