सरपंच के भ्रष्टाचारी कारनामों पर प्रशासन की ढीली कार्यवाही-प्रभारी मंत्री के अनुमोदन पर भी नहीं पहुंचा जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत में। 03 दिन में कार्यवाही कर प्रभारी मंत्री को करवाना था अवगत।



कल्याणपुरा सरपंच के खिलाफ स्थानिय निवासी ने शिकायत की जिसकी जांच तत्कालीन  संयुक्त कलेक्टर आकाश सिंह ने की थी, मगर जांच प्रतिवेदन के अभी तक अते पते नहीं हैं। 
जिला पंचायत के दफ्तर से जिसे लेकर जिला पंचायत कार्यालय से एक लेटर जनपद पंचायत झाबुआ को एक लेटर जारी हुआ है जिसमें जांच प्रतिवेदन प्रेषित किये जाना लिखा है ताकि कार्यवाही को आगे बढ़ाया जा सके। 
मगर इस सम्बन्ध में तत्कालीन सीईओ जनपद झाबुआ को अधिक जानकारी नहीं है और वर्तमान सीईओ को कोई खबर नहीं क्युंकि वो नये है और फिलहाल प्रदेश मुखिया के आगमन की तैयारियों में व्यस्त हैं। 
 

हालांकि अभी एक लेटर ही जारी हुआ है जिसमें रोड़ निर्माण में राशि निकल कर गबन करने का मामला है, अन्य शिकायत पर अभी गौर नही फरमाया है, जबकि सरपंच कल्याणपुरा के पंचायत में गबन के ढ़ेरो मामले उजागर होने और स्पष्ट कार्यवाही के इन्तजार में बेसब्र खड़े हैं।

सरपंच कल्याणपुरा ने पंचायत में अपने रिटायर्ड पिता जो अब इस दुनिया में नही है। उनको सप्लायर बना दिया था। जबकि वों चपरासी की पोस्ट से रिटायर हुये व्यक्ति थे जिनको सप्लायर का अर्थ भी नहीं पता था। जो ठीक से किसी लिखवट को पढ़ न पाये उनको सप्लायर बनाकर पंचायत के लाखों रुपये का कार्य सरपंच ने किया। और उसी का फायदा उठा कर पंचायत से लाखों के बील पास कर दिये गये। 
इस बिन्दु पर भी यदि प्रशासन जांच कर दे तो सरपंच का लाखो रुपये का गबन सामने आ जायेगा। 

गरीब जनता के हक़ की कमाई का लाखों का गबन करने वालों को शासन किस नियत से छोड़ देता है, तुरंत कार्यवाही कर गबन करने वालों पर सख्त और दंडात्मक कार्यवाही क्यूं नहीं करता। 
कल्याणपुरा सरपंच पर जब धारा 40 का आदेश आया तब भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी। उसके बाद शिकायत पर शिकायत होती गयी लेकिन कार्यवाही पर प्रशासन का सर झुका हुआ रहा। 
यू तो सरपंच ने बहुत से फर्जी कार्य कर शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया हैं। जिसकी जांच जरूरी हैं। 

फिलहाल 29 सितम्बर 21 को जिला पंचायत ने जनपद पंचायत को लेटर जारी कर प्रतिवेदन प्रेषित करने को कहा है और 03 दिवस में आगामी कार्यवाही को प्रभारी मंत्री को  बताई जा सके, लेकिन जब कार्यवाही आगे नहीं बढी तो प्रभारी मंत्री को क्या बताएगे।
फिर भाजपा उस सरपंच के घोटाले गबन पर सख्त कार्यवाही नहीं करवा रही जो कांग्रेसी विचार धारा में प्रवाहित है अपने हित के लिये भाजपा में आया फिर हित साधने के लिये कांग्रेस में पहुंचा।

बहरहाल भाजपा जिन पर दया कर छोड़ देती है वक्त आने पर वो किसी भी भाजपायी पर तनिक भी रहम नहीं करेंगे। यह बात सभी भाजपाइयों पर लागू होती हैं।
फिर भितरघात कर भ्रष्टाचारियों को तो तत्काल प्रभाव से कार्यवाही करवाना चाहिये ताकि जनता जो भाजपा से चाहती है वो खुशी उसे मिले और आने वाले समय में साथ भाजपा का ही दें। 

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