शिक्षक दिवस पर शराब में धूर्त शिक्षकों का मांसाहारी जश्न-BRC जिन शिक्षकों के तबादले के विरोध में लगा रहा था दौड़ उन पर स्टे का भी शामिल है जश्न।



गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु और गुरू देवों महेश्वरा। ये उन गुरुओं के लिये कहा गया है जिसमें गुरू के गुर, शिक्षा प्रदान करने की प्रतिभा होती थी। जो शिष्य को समझ कर उनको उसी अनुरुप शिक्षा देते थे। 
वर्तमानस्थिति बदल गयी है। शिक्षक खुद सीख कर आते है और अधुरा ज्ञान दे कर सरकार से पुरा वेतन वसूल करते है।  और न दो तो आंदोलन कर बहिष्कार करते है। 
खैर हम बात कर रहे है, शिक्षक दिवस की। जिस दिन सभी शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। और शिक्षक खुद भी अपने शिक्षको का सम्मान करते है। जिसने जैसा सीखाया है उसका धन्यवाद करते है। 
झाबुआ BRC का भी खुद का एक अलग तरीका है धन्यवाद करने का जिसमें वो शिक्षक दिवस पर अपनों के साथ जश्न मनाता है। दरअसल इस जश्न में एक और जश्न शामिल है। 


भाजपा ने भी कांग्रेस की तरह पैसा कमाने के लिये लोगों के ट्रांसफर किये और उन्हीं तबादलों को वापसी के लिये भी पैसा लेना शुरू किया। तबादले की तो इतनी कहानियां है की हर घंटे नया मसाला तैयार ही मिले।

BRC झाबुआ जिन ट्रान्सफर के लिये जगह-जगह दौड़ रहा था वो दौड़ना सफल हुआ उन तबादलों पर वह स्टे ले आया जो की भाजपा के मुंह पर एक तमाचा है। ऐसा ही एक तमाचा झाबुआ DPC भी भाजपा के मुंह पर मार के गया है जिसका जिक्र भी आपके सामने जल्द ही किया जायेगा।



हालांकि पुरा वीडियों देख समझ में सब आ जायेगा। मांसाहारी जश्न में शराब और शबाब का कस, किस कदर कुर्राटी मार रहा है। शिक्षकों को जो चीजे शोभा नहीं देती वो चीजे करना भी नहीं चाहिये। 
इनको भविष की चिंता है भी नहीं क्युंकि सरस्वती के ये लाल, लक्ष्मी की लालसा में राक्षसी गुणों से ओतप्रोत है। और शासन, और प्रशासन अभी भी आंख मूंद कर बैठा है। 

बहरहाल अधर्मी की बनावटी आकृति को न पहचान पाना आपके लिये विनाशकारी है। धूर्त शिक्षकों का शिक्षक दिवस पर शराबी होना संस्कृति के विरुद्ध हैं और अधर्मी यहीं चहता है संस्कृति समाप्त हो जाये, शिक्षा नष्ट हो जाये। शासन नहीं तो प्रशासन को इन अधर्मियों शिक्षको की ऐसी दुष्टता को रोकना चाहिये। 


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